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Archive for अगस्त, 2008

कभी कभी कुछ लफ्ज़ दिल को ज़ख्म दे जाते हैं
कभी कभी मरहम भी दर्द का सबब बन जाती है
कब कौन आ के कौन सा ज़ख्म उधेड़ दे ,क्या ख़बर
कभी कभी दुआएं भी बद्दुआ बन जाती हैं
तस्वीर का रुख बनाने वाले को भी न समझ आया
कभी कभी आईने भी तस्वीर को बदल देते हैं

जब ज़िन्दगी में भागते भागते हम थकने लगते हैं तब मन उदास होने लगता है । आत्मा बोझिल होने लगती है । कुच्छ देर कहीं ठहरने को दिल करता है मगर ज़िन्दगी तो ठहरने का नाम नही न . और हम एक ठिकाना ढूँढने लगते हैं जहाँ khud ko mehsoos kar सकें।कुच्छ der khud ko waqt ke aaine mein dekh सकें, kya खोया, क्या पाया, जान सकें

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4:11:00 AM by vandana
जब जिंदगी में भागते भागते हम थकने लगते हैं ,मन उदा…

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3:38:00 AM by vandana
virhan का दर्द

8/6/08 by vandana
virhan का दर्द savan क्या jane कैसे katate हैं दिन…

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8/6/08 by vandana
virhan का दर्द savan क्या jane कैसे katate हैं दिन…

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8/6/08 by vandana
virhan का दर्द savan क्या jane कैसे katate हैं दिन…

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8/6/08 by vandana
virhan का दर्द savan क्या jane कैसे katate हैं दिन…

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8/6/08 by vandana
भीगा सावन

8/4/08 by vandana
गर किसी को मीले मेरा पता

8/1/08 by vandana
कश्ती

7/30/08 by vandana
तड़प

7/29/08 by vandana
एक कतरा खुशी

7/29/08 by vandana
सिसकते ज़ख्म

7/24/08 by vandana
ख्याल

7/23/08 by vandana
हर गम में एक खुशी छुपी है हर रात में एक दिन छुपा ह…

7/13/08 by vandana
टूटा दिल

7/13/08 by vandana
इंतज़ार खुशियों का

7/3/08 by vandana
कहीं बहुत गहरे कुछ चुभ सा गया है हमने भी चाहा कोई …

6/20/08 by vandana
आहत हो जाती है वो जब कोई दुत्कार देता है हर किसी …

1 comment 6/19/08 by vandana
अहसास

6/14/08 by vandana
हर गम दुनिया में सभी को नसीब नही होता कोई चाहने वा…

draft
6/14/08 by vandana
खामोश निगाहों की जुबान हैं आंसू, दिल पर किसी ज़ख्म …

6/13/08 by vandana
मेरा घर

6/10/08 by vandana
विरानियाँ हैं घर मेरा tanhaiyan हैं sathi और गम है…

draft
6/10/08 by vandana
दर्द -ऐ – दिल

2 comments 6/8/08 by vandana

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virhan का दर्द

virhan का दर्द sawan क्या जाने
कैसे कटते हैं दिन और कैसे कटती हैं रातें
बदल तो आकर बरस गए
चहुँ ओर हरियाली कर गए
मगर virhan का सावन तो सुखा रह गया
पीया बीना अंखियों से सावन बरस गया
सावन तो मन को उदास कर गया
बीजली बन कर दिल पर गिर गया
कैसे सावन की फुहार दिल को जलाती है
इस दर्द को तो एक virhan ही जानती है

virhan का दर्द savan क्या jane
कैसे katate हैं दिन और कैसे katati हैं ratein
badal to aakar बरस गए
chahun ore hariyali कर गए
मगर virhan का sawan to sukha रह गया
पिया बिना ankhiyon से sawan बरस गए

भीगा सावन

बरखा की फुहारों ने तन मन भीगो दीया
सावन की बहारों ने मौसम बदल दीया
ऐसे भीगे मौसम ने कुछ याद दीला दीया
वो बचपन में बारीश में भीगना
वो सखियों के संग बारीश में नाचना
फिर हर पल मस्ती में झूमना
आज भी उन्ही पलों के लिए तरसना
हर लम्हा यादों में फिर जींदा कर दिया
हर सावन में बारीश की फुहारों में
उन्ही पलों को यादों में फिर से जीना
बचपन की याद दीला गया
हमको हमारे बचपन से मीला गया

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