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खुद को ढूँढ रही हूँ………ह्रदय गह्वर में ………अंतहीन प्रकाश के अंतिम छोर तक ………चुंधियायी आँखों से ………उस तरफ़ कौन है?

उपसंपादक · Delhi, India · Nov 2012 to present
साहित्य प्रेमी संघ” www.sahityapremisangh.com की नई पहल…..”सृजक”…..पत्रिका…..शब्दों की नई दुनिया के निर्माता http://www.facebook.com/Srijakhindi

 

एक गृहिणी हूँ………लिखना और पढना मेरे शौक हैं।

दर्द को आवाज़ देती हूँ
तब ज़िन्दगी से मिलती हूँ

एक बहता हुआ दरिया हूँ
एक उडता हुआ ख्वाब हू
एक दर्द भरी आवाज़ हूँ
एक दर्द भरा साज़ हूँ
एक गिरती हुई दीवार हूँ
एक बिना सुर का साज़ हूँ
एक खामोशी का पैगाम हूँ
जो कभी किसी दिल तक
किसी धडकन तक पहुँचा ही नही

किसी की पसन्द नही……… तो क्या
किसी की चाह नही………… तो क्या
देखो ना फिर भी ………सांसें चल रही हैं

जी चाहता है टूटकर बिखर जाऊँ
तेरे इश्क मे यूँ मज़बूर हो जाऊँ
इक घडी जी जाऊँ और
उम्र भर के लिये मर जाऊँ

दर्द की इम्तिहा भर दूँ
आ तुझमे इक चाह भर दूँ
मेरे कातिल तेरी आँखो मे आ
बस अपनी तस्वीर भर दूँ

चाहत होती जीने की तो गम ना था
मगर मरने की आरज़ू ने बेदम कर दिया

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