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Archive for अगस्त, 2011

बताओ कौन से सितारे में लपेटूँ बिखरे अस्तित्व को ?

यूँ तो रोज किसी ना किसी को
बिखरते देखा है मैंने
मगर कभी देखा है
खुद को बिखरते
टूटते किसी ने ?
आजकल रोज का नियम है
खुद को बिखरते देखना
देखना अभी कितनी जगह
और बाकी है
हवाओं के लिए
किन किन दरारों से
रिसने की बू आती है
इबादत की जगह बदल दी है मैंने
शायद तभी देवता भी
मंदिर में नहीं रहते
सबको एक ही काम सौंपा है
 खुदा ने शायद
हर मुमकिन कोशिश करना
कोई ना कोर कसर रखना
बहुत बुलंदियों को छू चुकी है ईमारत
अब इसे ढहना होगा
मिटटी में मिलना होगा
बिखराव भी तो एक प्रक्रिया है
निरंतर बहती प्रक्रिया
प्रकृति का एक अटल हिस्सा
फिर उससे मैं कैसे अछूती रहती
सृष्टि के नियम का
कैसे ना पालन करती
मगर पल पल बिखरना
और फिर जुड़ना और फिर बिखरना
इतना आसान होता है क्या
एक बार मिटना आसान होता है
मगर पल पल का बिखराव
दिमागी संतुलन खो देता है
अब कोई कैसे और कब तक
खुद को संभाले
दिल के टूटने को तो
जज़्ब कर भी ले कोई
मगर जब वार दिमाग पर होने लगे
अस्तित्व की सिलाइयां उधड़ने लगें
और डूबने को कोई सागर भी ना मिले
बताओ कौन से सितारे में लपेटूँ बिखरे अस्तित्व को ?

कृष्ण लीला ……भाग 10


सत्ताईस दिनों में 

फिर वोही नक्षत्र पड़ा था
 
आज कान्हा ने भी

करवट लिया था
 
नन्दभवन में 

आनंद उत्सव मन रहा था
 
ब्राह्मन स्वस्तिवाचन कर रहे थे

 
नन्द बाबा दान कर रहे थे

 
मेरा लाला अभी अभी सोया है

 
गोपियाँ आएँगी तो बड़ा सताएंगी

 
कोई गाल  खिंचेगीतो कोई गले लगाएगी

 
मेरे लाला की  नींद बिगड जाएगी
ये सोच मैया ने एक छकड़े में
कपडा बाँध लाला को लिटा दिया
अब मैया गोपियों के संग
नाचने गाने लगी
कान्हा के लिए उत्सव मनाने लगी

वहाँ तो बात बात मे उत्सव मनता था
लाला ने करवट ली जान 
आनन्द मंगल होने लगा
इधर कंस का भेजा शकटासुर आया था
और छकड़े में आकर छुप गया था
जब कान्हा ने देखा ये मुझे मारना चाहता है
तब कान्हा ने रोना शुरू किया
सोचा कोई होगा तो मुझे उठा लेगा
मगर मैया तो नाचने गाने में मगन थी
और आस पास ग्वाल बाल  खेल रहे थे
मगर किसी ने भी ना कान्हा का रोना सुना
जब देखा कान्हा ने सब अपने में मगन हुए हैं
तब कान्हा ने धीरे से अपना पैर उठाया है
और छकड़े को जोर लगाया है
पैर के छूते  ही छकड़ा उलट गया
और सारा दधि  माखन बिखर गया
कपडा भी फट गया
और कान्हा नीचे गिर गया
मगर शकटासुर का काम  तमाम हुआ
इधर जैसे ही सबने शोर सुना
गोप गोपियाँ दौड़े आये
और आपस में बतियाने लगे
ये छकड़ा कैसे पलट गया
कोई आया भी नहीं
कोई उल्कापात भी नहीं हुआ
कहीं से कोई आँधी  नहीं चली
पृथ्वी में भी ना कम्पन हुआ
फिर छकड़ा कैसे उलट गया
तब वहाँ खेलते ग्वाल बाल बोल उठे
ये लाला ने पैर से उल्टा दिया
मगर उन्हें बच्चा जान
किसी ने ना विश्वास किया
फिर नंदबाबा ने शान्तिपाठ करा
ब्राह्मणों का आशीर्वाद दिलाया
और लाला को गले लगा लिया

क्रमश:…………

आइये मिलिये ग़ुडिया इंग्लिशतान से

आओ मिलाऊँ सबको मै 
गुडिया इंग्लिशतान से 
रहन सहन आचार वि्चार मे 
जिसके बसता हिन्दुस्तान है 
इंग्लिशतान से आयी वो 
मगर हिंदी ना भूल पायी जो 
रुसी , अंग्रेजी , हिंदी सब भाषाओं का
जिसको ज्ञान है
पर सबसे ऊपर अपनी
हिन्दुस्तानी जबान है 
खुशदीप सहगल, सर्जना शर्मा,गीताश्री ने
  शिखा वार्ष्णेय से मिलने को 
प्रेस क्लब मे ब्लोगर मीट कराई है 
राकेश कुमार और राजीव तनेजा 
सपत्नीक पधारे थे 
उसमे हमने भी अपने हाथ आजमाये थे 
मीठी वाणी ने सबके मन को मोहा था
 प्रेम भरी वाणी ही सब ब्लोगर का तोहफ़ा था
 बातों की सबने खूब
धमाचौकडी मचाई थी 
खाने पीने के लिए
पेट भी किराये पर मंगवाये थे 
जितना  खाया उतना ही
बैठकरवार्तालाप किया 
राजनीति से लेकर 
घर दुनिया तक
सब पर विचारों का आदान प्रदान किया 
अब कैसे कह दें ये दुनिया आभासी है 
जब विदेशी धरतीवासी
भारतीय भी मिलन को आये थे 
दूरी का ना कोई महत्त्व रहा 
सिर्फ़ स्नेह का ही आदान प्रदान हुआ 
हंसी खुशी शुभकामनाओं संग
 शिखा जी को विदा किया 
प्रेम के नाते बने रहें 
ब्लोगर मीट होती रहे 
ब्लोगिंग आगे बढती रहे 
यही कामना करते हैं
 चलो दोस्तों अब हम भी विदा लेते हैं।

उडान तो आसमां की तरफ़ ही होती है ना……………

अजनबी मोड
अजनबी मुलाकात
जानकर भी अन्जान
पता नही वजूद जुदा हुये थे
या …………
नहीं , आत्मायें कभी जुदा नही होतीं
वज़ूद तो किराये का मकान है
और तुम और मै बताओ ना
वजूद कब रहे
हमेशा ही आत्माओ से बंधे रहे
अब चाहे कितनी ही
बारिशें आयें
कितने ही मोड अजनबी बनें
कितनी ही ख्वाहिशें दम निकालें
और चाहे चाय के कप दो हों
और उनमे चाहे कितना ही
पानी भर जाये
देखना प्यार हमेशा छलकता है
वो कब किसी कप मे
किसी बारिश की बूंद मे
या किसी फ़ूल मे समाया है
वो तो वजूद से इतर
दिलो का सरमाया है
फिर कैसे सोचा तुमने
हम जुदा हुये
हम तो हमेशा
अलग होते हुये भी एक रहे
एक आसमां की तरह
एक पंछी की तरह
कहीं भी रहे
उडान तो आसमां की तरफ़ ही होती है ना……………

झूठे मक्कारों के देश मे गांधी ने क्यों जनम लिया

किससे करें शिकायत
किससे करें गिला
झूठे मक्कारों के देश मे
गांधी ने क्यों जनम लिया
ये गांधीवादी बनते हैं
जनता पर अत्याचार करते हैं
सिर्फ़ बातों मे ही सब्ज़बाग दिखाते हैं
मगर आचरण मे ना
गांधी के उपदेश लाते हैं
गांधी की तस्वीर के नीचे ही
सच को कदमों तले कुचलते हैं
कदम कदम पर धोखा देते हैं
अपनी बातों से ही मुकरते हैं
गांधी गर होते ज़िन्दा
अपने देश का हाल देख
खुदकुशी वो भी कर लेते
अपने नारों का
अपनी बातों का
अपनी मर्यादाओ का
यूँ तिरस्कार ना देख पाते
जो राह दिखाई थी
उस पर चलने वालों को
तिल तिल कर ना मरते देखा जाता
कसाब , अफ़ज़ल की खातिर मे
देश के कर्णधारों को
यूँ दण्डवत करते देखते
तो सच मे गांधी आज
लोकतंत्र की परिभाषा पर
खुद ही शर्मिंदा होते
किसकी खातिर संघर्ष किया
किसकी खातिर अनशन किये
किसकी खातिर जाँ कुर्बान की
गर पता होता तो आज
गांधी भी ज़िन्दा होते
और देश पर विदेशियो का
राज होता तो क्या गलत होता
कल भी विदेशी राज करते थे
आज भी विदेशी राज करती है
देश की जनता तो बस
भ्रष्टाचार की बलिवेदी पर चढती है
गर गांधी ने ये सब देखा होता
तो सिर शर्म से झुक गया होता
अन्तस मे पीडा उपजी होती
गर कुर्सी के लालची नेताओं की
ये ऐसी मिलीभगत देखी होती
जहाँ कुर्सी की खातिर
जनता से विश्वासघात होता है
वहाँ संविधान भी आज
अपनी किस्मत पर रोता है
कैसे करे इस बात को साबित
जनता को ,जनता के लिये, जनता के द्वारा
ये तो सिर्फ़ एक किताबी तहरीर
बनी है मगर इसमे ना कोई
जनता की भागीदारी है
जनता तो सिर्फ़ प्रयोगों
तक सीमित होती है
गर देखा होता आज देश का ये हाल
गांधी ने भी अफ़सोस किया होता
क्यूँ मैने झूठे मक्कारों धोखेबाजों के
देश मे जनम लिया……………

कृष्ण लीला………भाग 9

करने लगे विचार ग्वाल बाल
कैसे करें दाह संस्कार
राक्षसी बहुत बडी थी

अट्ठारह कोस में थी गिरी
कुल्हाड़ी से उसके
अंगों को काट काट
एकत्र किया और जला दिया
दिव्य सुगंधित धुंआ जब उठा
ग्रामवासियों का अचरज का
ना पारावार रहा
मगर जिसे ठाकुर ने छू लिया हो
जिसका  स्तनपान किया हो
फिर चाहे वो कितना बड़ा पापी हो
स्पर्श से पापमुक्त हो जाता है
और भगवान सी दिव्यता पा जाता है
जो गति बाद में यशोदा को पानी थी
वो आज प्रभु ने पूतना को दे डाली थी
क्यूँकि स्तनपान माँ का किया जाता है
इस कारण परमगति की  अधिकारिणी जाना
और माँ की  पदवी दे मुक्त किया
ऐसे दयालु प्रभु का क्यों ना कोई चिंतन करे
जो उन्हें मारने आता है
उसे भी परमगति जो देते हैं
ऐसे दीनदयालु प्रभु कहाँ मिलते हैं
इतनी सी बात मानव ना समझ पाता है

पूतना वध सुन कंस घबरा गया
मुझे मारने वाला गोकुल में है जान  गया 
सभासदों को अति द्रव्य का लालच दिया
लालचवश ब्राह्मण श्रीधर बोल उठा
ये कार्य मैं संपन्न करूंगा
राजन तुम ना चिंता करो
उस बालक को मार तुझे अभय दूंगा
पंडित का वेश बना
यशोदा के पास पहुँच गया
और बालक का दिव्य हाल कहा
मीठी मीठी बातों से जब
यशोदा का विश्वास जीत लिया
तब यशोदा बालक को ब्राह्मण के पास
छोड़ स्नान को चली गयी
मगर कन्हैया तो सब चाल जान  गए थे
ब्राह्मण की कुटिल इच्छा  को ताड़ गए थे
उसकी खोटी इच्छा जान
पालने  से उतर पड़े
ब्राह्मण की जिह्वया मरोड़ डाली
दूध- दही मुँख पर लिपटा डाली
बर्तन सारे फोड़ दिए
मगर क्यूँकि ब्राह्मण था
इसलिए जीता छोड़ दिया
और फिर जा पालने  में लेट गए
यशोदा ने जब आकर देखा
ब्राह्मण के मुँह पर दधि -माखन लिपटे देखा
बर्तनों को फूटा देखा
तो यशोदा बोल उठी
महाराज खाना तो खा लेते मगर
बर्तन काहे  फोड़ डाले
उसने कन्हैया की तरह इशारा किया
जुबान तो पहले ही ऐंठ चुकी थी
मगर मैया ने ना विश्वास किया
क्रोधित हो ब्राह्मण को बुरा भला कहा
महाराज मेरा लाल अभी पलने में लेटा है
कैसे आपकी बात मानूं
वो कैसे ऐसा कर सकता है
क्यूँ झूठ बोल रहे हो
ब्रह्मत्व को कलंकित कर रहे हो
इतना कह ब्राह्मण को निकलवा दिया
रोता ब्राह्मण कंस के पास आया
ब्राह्मण का हाल देख
कंस घबरा गया
मेरा हाल यही होना है जान  गया 
 
 
क्रमश:…………

मेरे ह्रदय मे जनम तुम लो ना

टैग का बादल