Just another WordPress.com weblog

Archive for अप्रैल, 2008

न जाने कहाँ खो गए हम

जाने कहाँ खो गए हम
बहुत ढूँढा पर कहीं मिले हम
जाने कौन से मुकाम पर है ज़िंदगी
हर मोड़ पर एक इम्तिहान होता है
चाहतों के मायने बदल जाते हैं
जिनका इंसान तलबगार होता है
दुनिया की भीड़ में गूम हुयी जाती हूँ
ख़ुद को ढूँढने की कोशिश में
और बेजार हुयी जाती हूँ
क्या कभी ख़ुद को पा सकेंगे हम
इसी विचार में खोयी जाती हूँ

टैग का बादल