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तुम और मैं
दो शब्द भर ही तो हैं
बस इतना ही तो है
हमारा वज़ूद
जो कब शब्दकोष की भीड में
खो जायेंगे
पता भी नहीं चलेगा
फिर भी प्रयासरत रहते हैं
दो शब्दों के बीच के खालीपन को भरने के लिये
जानते हो
ये दो शब्दों के बीच जो खाई होती है ना
उसमें ही सम्पूर्ण दर्शन समाया है
जीवन का, उसकी उपलब्धियों का
सार क्या है खालीपन का
ये खोजना है ?
और खोज के लिये दूरी जरूरी होती है
मैं से तुम तक की
और तुम से मैं तक की
ताकि गर उस सिरे से तुम चलो
और इस सिरे से मैं तो
प्रतिबिम्बित हों आईने में
और भेद मिट जाये खालीपन का
दो शब्दों की दूरी का
क्योंकि शब्द ही तो अक्षर ब्रह्म है
शब्द ही तो प्रणव है
शब्द ही तो ओंकार है
शब्द की तो साकार है
फिर कैसे रह सकता है दरमियाँ कोई परदा खालीपन का………
बस चिन्तन और विश्लेषण की दरकार ही
खोज को पूर्ण करती है जिसका मुडाव अन्दर की तरफ़ होता है
सत्य की तरफ़ होता है ……
और यही खालीपन ही तो सत्य है
क्योंकि सत्य निराकार होता है……तुम और मैं के बीच भी और उनके साथ भी
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Comments on: "दो शब्दों के बीच के खालीपन को भरने के लिये" (12)

  1. aap ki shabdik bhawna se sahmat hun, kyun ki mai or tum ki khali jagah koi nahi bhar pata hai. ta zindgi…………………….

  2. बहुत सुंदर रचना.

  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति…!आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (30-11-2013) "सहमा-सहमा हर इक चेहरा" “चर्चामंच : चर्चा अंक – 1447” पर होगी.सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है.सादर…!

  4. बहुत ही सूंदर भावपूर्ण रचना .

  5. बस चिन्तन और विश्लेषण की दरकार हीखोज को पूर्ण करती है जिसका मुडाव अन्दर की तरफ़ होता हैसत्य की तरफ़ होता है ……बहुत गहन चिंतन, बहुत सहजता से अभिव्यक्त..

  6. गहन अनुभूति लिए बहुत ही सुन्दर रचना…:-)

  7. बहुत ही सूंदर रचना .

  8. क्योंकि शब्द ही तो अक्षर ब्रह्म हैशब्द ही तो प्रणव हैशब्द ही तो ओंकार हैशब्द की तो साकार हैफिर कैसे रह सकता है दरमियाँ कोई परदा खालीपन का…तुम और मैं में ही समाया पूरा ब्रह्मांड …बेहतरीन रचना

  9. वाकई इन दो शब्दों के बीच सम्पूर्ण जीवन दर्शन समाया है…जिस दिन ये अंतर मिट जाता है…हर तरफ मै ही दिखाई देता है…

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