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मेरे फ़लक से तुम्हारे फ़लक तक 
विचरती आकाश गंगायें 
जरूरी तो नहीं 
माध्यम बने ही 
सम्प्रेक्षणता का 
जबकि जानते हो 
ध्वनियों में भी गतिरोध हुआ करते हैं 
उमस के दरवाज़ों पर भी ताले हुआ करते हैं 
खपरैलों के भी उडने के मौसम हुआ करते हैं 
यूँ भी बेवजह ढोलक पर थाप नही दी जाती 
तो फिर क्यों बेज़ार हो खटखटाऊँ मौन की कुण्डियाँ 
जब नक्काशी के लिए मौजूद ही नहीं सुलगती लकड़ियाँ 

अब कौन  दीवान-ए -आम और दीवान-ए -ख़ास की जद्दोजहद में उलझे 
जब नागवारियों की नागफनियों से गुलज़ार हो मोहब्बत का अंगना 

ज़िन्दगी जीने के सबके अंदाज़ जुदा हुआ करते हैं जानम !!!
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Comments on: "ज़िन्दगी जीने के सबके अंदाज़ जुदा हुआ करते हैं" (14)

  1. अपना अपना अंदाज़ जिंदगी का — ज़ीने का मूलमंत्र है ज़रूर,मगर पाश्चात्य जिवाब शैली ! अपनी पंक्तियों में आपने इसे अति सशक्त भाव से व्यक्त किया है.बहुत बहुत बधाई ! तनिक इसे भी देखें:-"आंसू और हंसी के सन्दर्भ में पारदर्शी होता है हर शक्श,जब हम मिलते है तो हम पर पड़ता है एक दूसरे का अक्स. तब हम जुदा नही होते,ख्यालो में रहते औ सोच के व्योम में विचरते है…."पुनः बधाई – सार गर्भित, सादी और सुन्दर पंक्तियों के लिए ! शाबाश !!

  2. अपना अपना अंदाज़ जिंदगी का — ज़ीने का मूलमंत्र है ज़रूर,मगर पाश्चात्य जिवाब शैली ! अपनी पंक्तियों में आपने इसे अति सशक्त भाव से व्यक्त किया है.बहुत बहुत बधाई ! तनिक इसे भी देखें:-"आंसू और हंसी के सन्दर्भ में पारदर्शी होता है हर शक्श,जब हम मिलते है तो हम पर पड़ता है एक दूसरे का अक्स. तब हम जुदा नही होते,ख्यालो में रहते औ सोच के व्योम में विचरते है…."पुनः बधाई – सार गर्भित, सादी और सुन्दर पंक्तियों के लिए ! शाबाश !!

  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति…!–आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (19-10-2013) "शरदपूर्णिमा आ गयी" (चर्चा मंचःअंक-1403) पर भी होगी!–सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।–हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।सादर…!डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

  4. सुंदर रचना के लिये ब्लौग प्रसारण की ओर से शुभकामनाएं…आप की ये खूबसूरत रचना आने वाले शनीवार यानी 19/10/2013 को ब्लौग प्रसारण पर भी लिंक की गयी है…सूचनार्थ।

  5. आपने इतनी सरलता से आपने ये कविता लिखी हैं कि पढ़ते के साथ नया जोश आ गया , आपकी ये पंक्ति तो मेरे दिल को छू गयी। "ज़िन्दगी जीने के सबके अंदाज़ जुदा हुआ करते हैं जानम !!!:बहुत बहुत धन्यवाद वंदना जी

  6. आपने इतनी सरलता से आपने ये कविता लिखी हैं कि पढ़ते के साथ नया जोश आ गया , आपकी ये पंक्ति तो मेरे दिल को छूगयी। "ज़िन्दगी जीने के सबके अंदाज़ जुदा हुआ करते हैं जानम !!!:बहुत बहुत धन्यवाद वंदना जी

  7. कल 20/10/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर धन्यवाद!

  8. बहुत बढिया प्रस्तुति..

  9. बहुत बढ़िया भाव , बधाई आपको ।

  10. बेहतरीन अभिवयक्ति…..

  11. बहुत सुन्दर और प्रभावी रचना…

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