Just another WordPress.com weblog

कुछ दिल की थीं अपनी रवायतें 
कुछ ज़िन्दगी से थीं शिकायतें 
चल तो दिये थे सफ़र में मगर 
कुछ रुसवाइयों की थीं अपनी इनायतें 

( मुकम्मल ज़िन्दगी और मुकम्मल जहान की खुशफ़हमियाँ ही शायद ज़िन्दगी गुजारने का ज़रिया हैं ) 

वरना 

किसे मिली जमीं किसे मिला आसमाँ 
हर आदम का नसीबा है इक दूजे से जुदा 

ना होता कोई सडक की खाक कोई महलों का बादशाह
इक दिन पल लग्न मुहुर्त में जिनका था जन्म हुआ 

ना बैसाखियों के दिन होते ना पलस्तरों की रातें 
जो कर्म की भट्टी में नसीब के दाने जल जाते 

फिर गरीब के झोंपड़ में भी नीलकलम खिल जाते 
जो ज़िन्दगी की स्लेट से नसीब के खेल मिट जाते 

फिर जात पाँत से ऊपर दिल के लेख लिखे जाते 
मिलन बिछोह के सारे तटबंध ही मिट जाते 

यूँ आसमान के सीने पर चहलकदमी कर पाते 
जो हाथ ना भी पकड़ते मगर साथ तो चल पाते 

( ख्यालों की दस्तक बेवजह भी हुआ करती है ……….यूँ ही भी )


Advertisements

Comments on: "ख्यालों की दस्तक बेवजह भी हुआ करती है" (26)

  1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ।।

  2. आपने लिखा….हमने पढ़ा….और लोग भी पढ़ें; …इसलिए शनिवार 20/07/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी…. आप भी देख लीजिएगा एक नज़र लिंक में आपका स्वागत है ……….धन्यवाद!

  3. वाह वाह क्या बात बहुत सुन्दर

  4. आपकी यह रचना दिनांक 19.07.2013 को http://blogprasaran.blogspot.in/ पर लिंक की गयी है। कृपया इसे देखें और अपने सुझाव दें।

  5. हर एक को सब कुछ कहाँ मिलता है … सुंदर प्रस्तुति

  6. मिली है आज तक यहाँ एक के हाथ से दुजे की कलाई…दिल पानी सा साफ हो..ना हो दुध अलग, ना अलग मलाई…भले हो सोने का पेन……चाहे मिले चांदी की स्याही….जब भी लिखे मेरी कलम…हर सही बंदे के लिए लिखे बस "भाई"..लिखे बस "भाई"…

  7. कैसे गुज़रती रात अँधेरा ग़दर में थामेरे उफक का चाँद तो तेरे शहर में थामैंने गुनाह करके आज तौबा कर तो लीपर प्यार तेरा मेरी ख़ता के असर में थाखुद को बचाती गर तो बचाती मैं किस तरहजितना भी ऐब था वो मेरे मोतबर में थामैंने ग़ज़ल के पेंच -ओ-ख़म को जान लिया हैवो दर्द लाज़मी था जो मेरे जिगर में थाजब से गया है हाथ ख़ुदारा छुडा के तूकुछ भी मज़ा न अब कहीं मेरे सफ़र में थाजोश-ओ-जुनूँ संभालती तो किस तरह 'अमूल'मेरा असीम मेरा ख़ुदा एक घर में था……..

  8. चाँद भी देखा फूल भी देखाबादल बिजली तितली जुगनूं कोई नहीं है ऐसातेरा हुस्न है जैसा…मेरी निगाहों ने ये कैसा ख्वाब देखा हैज़मीं पे चलता हुआ माहताब देखा हैमेरी आँखों ने चुना है तुझको दुनिया देखकरकिसका चेहरा अब मैं देखूं तेरा चेहरा देखकरमेरी आँखों ने …नींद भी देखी ख्वाब भी देखाचूड़ी बिंदिया दर्पण खुश्बू कोई नहीं है ऐसातेरा प्यार है जैसामेरी आँखों ने …रंग भी देखा रूप भी देखारस्ता मंज़िल साहिल महफ़िल कोई नहीं है ऐसातेरा साथ है जैसामेरी आँखों ने …बहुत खूबसूरत हैं आँखें तुम्हारीबना दीजिए इनको किस्मत हमारीउसे और क्या चाहिये ज़िंदगी मेंजिसे मिल गई है मुहब्बत तुम्हारी,…….

  9. बेहद सुन्दर रचना वंदना जी आभार।

  10. बिन पूछे,बिन बताए, जिसके हिस्से जो आ जाए!

  11. हाँ ,सिर्फ़ अनुमान ही कर सकते हैं कि ऐसा होता तो कितना अच्छा होता,पर क्या पता तब मन वैसा होता कि नहीं होता !

  12. संसार तो इसी का नाम है..अगर सब कुछ ठीक हो यहाँ तो भगवान को कोई याद ही न करे…

  13. बहुत सुन्दर रचना….

  14. wah wah wah…..adbhut shabd sanyojan

  15. बेहतरीन बहुत खुबसूरत!!

  16. बेहतरीन बहुत खुबसूरत!!

  17. बेहतरीन बहुत खुबसूरत!!

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

टैग का बादल

%d bloggers like this: