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आज जो कुछ घटित हो रहा है उसे देखकर कुछ प्रश्न मनोमस्तिष्क को मथ रहे हैं और हम से ही प्रश्न कर रहे हैं  

सार्वजनिक जगह किसलिए होती हैं ?

सार्वजानिक जगहों का दुरूपयोग या सदुपयोग किसके लिए है ?

कौन कैसे इन जगहों का प्रयोग कर रहा है और इन जगहों का वास्तव में कैसे प्रयोग किया जाना चाहिए इसके बारे में आज की पीढ़ी को कितनी जानकारी है 
आज की पीढी या तो अनजान है या जान कर भी अनजान बन रही है तभी मैट्रो में छायी अश्लीलता का एम एम एस बन जाता है और पोर्न साइट्स पर चला जाता है . मगर उसमे भी दोष मैट्रो को चलाने वालों को दिया जा रहा है कि  उनके यहाँ से ऐसी विडियो कैसे अपलोड हो गयीं मगर कोई ये नहीं सोच रहा कि :

1) ऐसी अश्लील हरकत जिन जोड़ों ने सार्वजानिक जगह पर की क्या वो सही थी ? 

2) क्या उस वक्त मेट्रो में सिर्फ वो दो ही थे या मेट्रो में बड़ों से लेकर बच्चे तक सवार थे ?

3) क्या उन्हें ऐसी हरकत करना शोभा देता है ? 

4) क्या ये सब लाइव देखकर छोटे बच्चों पर गलत असर नहीं पड़ेगा ? 

5) क्या उन्हें इस तरह की अश्लील हरकत करते देख यदि कुछ मनचले उनके साथ मिसबिहेव करने लगते तो दोष उसमे किसका था ? 

6) क्या सारी  जिम्मेदारी सरकार या मेट्रो आदि के संचालकों की ही हैं ? 

7) क्या जिम्मेदार नागरिक होने के नाते ये जिम्मेदारी हमारी भी नहीं है कि  हम अपने बच्चों को सही शिक्षा दें और सही गलत से अवगत कराएं ? 

8) और विडियो अपलोड होने पर इतना हंगामा क्यों ? 

9) क्या इससे सिर्फ लड़की की बदनामी ही होगी ? 

10) क्या किसी को ये नहीं दिख रहा कि  जो लड़की खुद सहमती से इसमें सम्मिलित है जब उसे अपनी बदनामी की चिंता नहीं तो दूसरे  कैसे करेंगे ?

11) क्या हम लड़की की बदनामी का डर दिखाकर लड़कियों को कुछ भी करने की शह नहीं दे रहे ?

जब उन्हें सार्वजानिक जगह पर अश्लील हरकत करते शर्म नहीं आ रही चाहे कितने ही लोग देख रहे हों , सबकी निगाह उन्हीं पर हो तो यदि ऐसे में उनके विडियो किसी ने अपलोड कर दिए तो क्या बुरा किया ?कम से कम अब सबको एक डर तो बन जायेगा कि  यदि हमने ऐसी कोई हरकत की तो आज के तकनीकी युग में अंजाम खतरनाक भी हो सकता है जो उनके भविष्य को भी बर्बाद कर सकता है . 

क्या ही अच्छा हो कि  से जोड़ों को पकड़ा जाए और उन्हें और उनके घरवालों को बुलाया जाए ताकि उन्हें उनकी हरकत से अवगत कराया जाए और जहाँ तक हो दंड भी दिया जाए ताकि औरों के लिए ये एक सबक बने और ऐसी अश्लीलता करने से पहले वो सौ बार सोचें तभी स्वस्थ समाज बन सकेगा .

आखिर कब तक और कितनी जगह सरकार पुलिस या सुरक्षा मुहैया कराती रहेगी . 

आज जरूरत है कि  कुछ जिम्मेदारियां हम खुद भी उठानी सीखें न कि  हर जगह सिर्फ अधिकारों के लिए लड़ते रहे और कर्तव्य की बारी आने पर पीठ दिखाएं .आखिर कब तक हम अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाडते रहेंगे अब हमें स्वंय इसका अवलोकन करना होगा जो यदि आज हम खुद ऐसी बातों का विरोध करना नहीं सीखेंगे आने वाली पीढी  , आने वाले  समाज की तस्वीर और भी भयावह होगी .

अब ये हम पर निर्भर है कि हम कैसा समाज चाहते हैं . स्वतंत्रता और स्वच्छंदता के अंतर को आज की पीढ़ी को समझना होगा तभी आने वाला कल सुरक्षित और सुखद होगा .

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Comments on: "मैट्रो में छायी अश्लीलता…जिम्मेदार कौन?" (27)

  1. दिल्ली में होने वाली हरकते यहाँ के लोकल बच्चे कम और बाहर से आए पढ़ने वाले बच्चे ज्यादा करते हैं ..क्यों कि उन्हें देखने और समझाने वाला कोई नहीं होता …नहीं तो इतना बैखोफ होकर सबके सामने ये सब कुछ करना …बहुत हिम्मत का काम है …और आज कल लड़को के साथ साथ लड़कियाँ भी बहुत आज़ाद हो गई है …उन बेचारे माँ- बाप को तो पता भी नहीं होता कि उनके बच्चे बाहर रह कर पढ़ रहें हैं या किसी और काम में अपने आप को मस्त कर चुके हैं ……जो भी है ये घटना बेहद निंदनीय है ……हम सब के लिए हमारे समाज के लिए और सब से ज्यादा आ के युवा के लिए जिसने हर चीज़ को ताक पर रख दिया है

  2. Anju (Anu) Chaudhary आज इस भीड में सभी शामिल हो गये हैं क्या दिल्ली में रहने वाले और क्या बाहर वाले ……अब जरूरी हो गया है उनके माँ बाप को भी पता चले कि वो आखिर कर क्या रहे हैं आखिर कब तक हम सिर्फ़ दूसरों पर अपने दोष मढते रहेंगे ? कब हम अपनी जिम्मेदारी समझेंगे और उठायेंगे ………दोषारोपण करना बहुत आसान है अब जरूरी हो गया है यदि कोई ऐसी घिनौनी हरकत करे तो उसकी वो हरकत भी सार्वजनिक हो तो कम से काम बाकी तो ऐसा करने से डरेंगे।

  3. पहले ही समुचित समाधान ढूढ़ लेना था और सूचित कर देना था।

  4. बहुत सार्थक प्रश्न उठाये हैं..मेट्रो को या किसी अन्य को दोष देने से क्या फायदा…आवश्यकता है हमें स्वयं इस बारे में सोचने की..बहुत सारगर्भित आलेख…

  5. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन चर्चा मे है मेट्रो – ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है … सादर आभार !

  6. आपकी एक एक बात से सहमत हूँ !

  7. ऐसी युवा पीढ़ी के माँ-बाप को पता चलना ही चाहिए कि उनकी औलाद क्या गुल खिला रही है ,,और वातावरण को कितना दूषित कर रही है ..ये हमदर्दी के काबिल नहीं ..

  8. घटना तो बेहद निंदनीय है पर इसमें …सब शामिल है जी अन्दर वाले और बाहर वाले …..!

  9. ये सब नार्मल है पश्चिमी सभ्यता में और वहीँ से प्रभावित होकर यहाँ के युवा भी ऐसी चीज़ों में लिप्त हो रहे हैं | सवाल उठाना बहुत आसान काम है पर क्या कोई ठोस और सटीक कदम भी उठा रहे हैं हम | जिसे देखो बस सवाल करने पर लगा रहता है जवाब कोई नहीं सोचता | निंदा करना, गलतियाँ निकलना और दूसरों पर उँगलियाँ उठाना कितना अच्छा लगता है पर जब ऐसा ही कुछ खुद के साथ घटता है तब सवाल गायब हो जाते हैं | बेहतर है के सवाल करने के स्थान पर सभ्य तरीके से जवाब ढूंढें जाएँ | हर एक चीज़ का मुद्दा बनाना भी ठीक नहीं |

  10. हमोरे बच्चे – उनके बच्चे वाली बात से बेहतर… यह होगा कि हम सब कहीं भी गलत होता है प्रतिकार करें .अपने से छोटो को समझाने का हर अवसर इगनोर न करे। 'इगनोर' करने से ही यह मुसीबत बढ़ रही है।

  11. @तुषार राज रस्तोगी जी पश्चिम में भी एक सीमा है ये सब करने की और ये वहाँ के कल्चर मे शामिल है और उस सीमा के बाद वहाँ भी पाबन्दी है अभी यही बात दीपक मशाल ने फ़ेसबुक पर कही है जो बाहर के देशों मे लगभग पाँच साल से रह रहे हैं तो कैसे हम दोष दें ………दूसरी बात अभी हमारा कल्चर ये सब नही मानता इतना खुलापन यहाँ क्या कहीं भी मान्य नही होगा । हम मुद्दा नही बना रहे जागरुक नागरिक होने के नाते जो गलत हुआ है उसमे दोष किसका है और क्या कदम उठाये जायें जो भविष्य मे ये सब ना हो ये देख रहे हैं और इसके लिये हमें ही पहल करनी होगी अपने अपने घर से , यदि मैट्रो ने ये सब सार्वजनिक किया है तभी हम जान पाये हैं वरना तो किसी को इतना पता ही नही चलता तो ऐसा ही होना चाहिये कि जो भी ऐसी हरकतें करे उसे सार्वजनिक किया जाये तो ऐसा करने से पहले सब डरेंगे और ऐसे कद्म नही उठायेंगे साथ ही हर अभिभावक को समझना होगा ध्यान देना होगा अपने बच्चे को उचित अनुचित का फ़र्क बताना होगा तब जाकर परिवर्तन आयेगा सिर्फ़ दूसरों पर दोषारोपण करने से कुछ नहीं होगा ।

  12. कुछ बातें बहुत निजी होती है । इन्हें सार्वजनिक करने से हम अपना ही नही समाज का भी अपमान करते हैं । फिर अपलोड होने से गुस्सा क्यूं । किसी को भी पुलिस को सूचित करने की नही सूझी । पुलिस हमारी रक्षक नही है ये बात भी है । कम से कम अब इस चर्चा से मां बाप सजग होंगे ।

  13. कुछ बातें बहुत निजी होती है । इन्हें सार्वजनिक करने से हम अपना ही नही समाज का भी अपमान करते हैं । फिर अपलोड होने से गुस्सा क्यूं । किसी को भी पुलिस को सूचित करने की नही सूझी । पुलिस हमारी रक्षक नही है ये बात भी है । कम से कम अब इस चर्चा से मां बाप सजग होंगे ।

  14. क्या कहा जाए, समाजिक बुराइयों का कहीं अंत ही नहीं दिखाई दे रहा है..कांग्रेस के एक मुख्यमंत्री असली चेहरा : पढिए रोजनामचाhttp://dailyreportsonline.blogspot.in/2013/07/like.html#comment-form

  15. Why are ppl doing so much halla gulla about Delhi metro MMS when they don't care about Sunny Leone's porn films all around us? In Hindustan must be banned these types of films. इस टीवी के द्वारा जो अश्लील विचार हमारे समाज में विकसित किये जा रहे है, वो बंद हो जायेंगे। आज कल विज्ञापन भी कुछ कम अश्लील नहीं आते फिर चाहे वो D.O. का हो या कंडोम्स का सरेआम दिखाया जाता है। टीवी पर music के नाम पर नगी औरतें दिखाई जाती है जिसे item song कहा जाता है। बेशर्मी की हद तो तब है जब क्रिकेट देखते देखते नंगी नचरिय को बच्चो के साथ बैठ कर देखना पड़ता है।आवाज वहां उठानी चाहिए जहाँ इसकी बुनियाद हो … इस मेट्रो पर तो बाद में पंहुचा जायेगा।पधारिये और बताईये  निशब्द

  16. @rohitas ghorela ji आपकी बात से सहमत हूँ कारण बहुत हैं मै भी जानती हूँ मगर अगर हम ऐसी बातों को जो आँख के आगे इस तरफ़ लाइव होने लगेंगी और उनका प्रतिकार नहीं करेंगे तो जो आज टीवी या विज्ञापन मे देख रहे हैं गली कूचों मे देखने को मिलने लगेगा तो सोचिये क्या वो सही होगा ? हम लोगों की आदत बन चुकी है कि अगर कुछ हो रहा है तो होने दो यदि हमने पहले ही प्रतिकार किया होता तो जो बात आपने कही है वो ना होती मगर हम चूक गये लेकिन अब नहीं चूकना क्योंकि हमारी एक छोटी से छोटी चूक ही हमें इस दलदल मे धकेल रही है अगर आज यहाँ से आवाज़ शुरु करेंगे तो कल बुनियाद तक भी जरूर पहुँच जायेंगे

  17. सच में ही यह पाश्चात्य प्रभाव है …—-.उन देशों में भी सामान्य स्तर पर इसे बुरा समझा जाता है परन्तु वहां सभी कुछ जानते हुए भी किंकर्तव्य विमूढ़ हैं क्योंकि अज्ञानता व असामाजिकता, अपराध में वह समाज बहुत आगे जा चुका है जहां से लौटना असंभव है …..—यदि हम, हमारे युवा न चेते तो वही गति होने वाली है…

  18. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुतिकभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |

  19. Vandana ji, Ab Agar Aapne ye Mudda Uthaya hi hai to mein Bhi Bahas mein Shamil hona chahunga.Darasal ye sab Kisi Samaaj visesh ya Kisi Particular Vichaardhara ke dwaara nahi balki "Freedom" ke naam par jo Badhaawa diya ja rha hai uska nateeja hai. Shi Kaha aapne ki Sarvjanik Jagah Sarvjanik hi hoti hai or wahan par ye sab Ashobhniya hai. Or Aisa karne walon ko Saja bhi milni chahiye par Kya Iss Saja ke liye Kewal Ladkon ko hi Dosh diya jayega. Coz Iss Ghatna mein ladkiyon ki bhi Purn Sahmati hai. Pichle dino Delhi mein Hue Rape Case ke Baad halla hua ki Ladkiyan Jo Chahe Pahne Unhe Aajadi hai, Par koi Unka Rape nai kar sakta. Sach hai. Par Kya Aajadi ke Naam par Nagn Ho jana "Freedom" hai. Agar Bharat ke Saidhantik Mulyon or Vichardhara ki Baat ki jaye to Bahut kuch hai jo Ban hona chahiye. Ashlilta Har Jagah Fail chuki hai. Net, TV se hote hue School tak ja pahunchi hai. Samajhna to ye hoga na ki Aajadi ke naam par Khulapan or Nangapan Khtm kiya jaye.

  20. बहुत सार्थक प्रश्न उठाये हैं..वंदना जी..

  21. happy labana ji aapka kahna bhi sahi hai ………..koshish ek taraf se nahi charon taraf se honi chahiye ……….magar parinaam aane me vakt lagega ….yahi maine kaha hai swatantrata aur swachchhandta ke antar ko samajhna jaroori hai aur kewal ladkon ko hi nahi ladkiyon ko bhi ……..maine to khud ye prashn uthaya hai ki wo ladki bhi utni hi jimmedar hai yadi wo khuleaam aise kritya me sammilit hai to doshi wo bhi utni hi hai jitna ladka ……….ye fark samajhna bhi bahut jaroori hai aur iske saath apne sanskar aur moolyon ko bhi un tak pahunchana jaroori hai aur iske liye sabse achchi pahal ghar se hi hoti hai magar aaj parents jab bachcha hota hai tabhi se uski galtiyon ki andekhi shuru kar dete hain balki yadi wo galat karta hai to hanste hain aise me sochiye us bachche ke mastishk par kya prabhav padega use kabhi sahi aur galat ka pata nahi chalega ………yadi koi unhein tokta hai to unhein bura lagta hai ……..to jad hamare gharon me hi chhupi hai pahle use door karna jaroori hai ……..aaj parents ko ye samajhna jaroori hai ki ham kya apne bachchon ko de rahe hain jaise denge vaisa hi wo banenge ….yadi ghar me uchit sanskar hon to koi takat nahi ki aise galat karya ki or agrasar kar sake ye sab wahin ho raha hai jahan sanskaar hain hi nahi sirf dikhawe me vishwaas hai aur kuch log in sabko modernity ka naam de dete hain magar bhool jate hain ki yahi modernity kitni ghatak hai ………iske baad samaaj , tv wagairah har jagah aati hai wahan bhi ankush hona jaroori hai nahi to kal behad bhayavah hoga ham sabhi jante hain

  22. very well written! I agree with each and every point.

  23. बहुत ही सार्थक प्रश्न उठाये हैं .

  24. ये सच है की ऐसी हरकतें युवा वर्ग को नहीं करना चाहिए … पर प्रश्न ये है की मेट्रो वालों ने क्यों इसे सार्वजनिक होने दिया … उनका क्या दायित्व था … शायद ये सब सहने की आदत है हमारे समाज की …

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